मनुष्य अबतक कितने बड़े मुर्ख कि हमारी लिखी बातों को झुठलाकर किताबों
मे लिखी झूठी बातो को इतिहास कहकर जन्म लेने वाले नवजीव (अपने बच्चे को) धर्मशास्त्र
कहकर पूजने को बताते रहें हैं, इतना भी सामने भडोसा नहीं कि स्समने लिखी हुई बातें
किसी रंग को स्याही का नाम देकर लिखी गई है
बताओ मनुष्य कितने बड़े मुर्ख समूचे संसार मे
ALL HUMAN ARE FULLY MAD AND CRAZY IN THE WORLD
(सभी मनुष्य पूर्णरूप पागल और सनकी समूचे संसार मे)